रीवा मेडिकल कॉलेज बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला भड़के, डीन पर भुगतान रोकने के आरोप। लंबित बिल और सफाई व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सुधार के सख्त निर्देश दिए।
उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के सामने ट्रक की टक्कर से MBBS छात्र हर्षित मेहरा की मौत। हादसे के बाद मेडिकल छात्रों ने आगर रोड पर किया चक्काजाम। पुलिस ने आरोपी ड्राइवर को किया अरेस्ट
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सोमवार को छात्रों के बीच हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के हॉस्टल और डे-स्कॉलर छात्रों के बीच ग्रुप लीव (जीटी) को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते लात-घूंसे और बेल्ट से मारपीट तक पहुंच गया।
रीवा में देहदान करने वाले रामकरण गुप्ता को प्रदेश सरकार के निर्णय के तहत दधीचि सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मेडिकल छात्रों के लिए उनका देहदान प्रेरणा बना।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाजापुर में मेडिकल कॉलेज और शुजालपुर में आयुर्वेदिक कॉलेज की घोषणा की। दो वर्षों में जिले को मिली कई बड़ी विकास योजनाएं।
रीवा स्थित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। गायनी विभाग की एचओडी डॉ. बीनू सिंह को, विभागीय विवाद और चिकित्सकों के इस्तीफे के बीच, एमडीआरयू का नोडल अधिकारी बनाए जाने का गुपचुप आदेश सामने आया है, जिससे डीन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने महंगे उपकरणों के बिना 80 रुपये के फोलिस कैथेटर से 68 बच्चों की आहार नली में फंसे सिक्के निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की। भोपाल में हुए राष्ट्रीय शिशु रोग सम्मेलन में इस शोध को प्रथम पुरस्कार मिला।
रीवा मेडिकल कॉलेज में नए स्पेशलिस्ट और पीजी कोर्स के लिए जबलपुर विवि की टीम ने चार विभागों का निरीक्षण किया। डीएम मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी कोर्स के शुरू होने की संभावना बढ़ी।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के गायनी विभाग में आंतरिक तनाव गहराता दिख रहा है। चार डॉक्टरों के इस्तीफा देने के बाद अब सह प्राध्यापक डॉ. शीतल पटेल का त्याग पत्र सामने आया है। पत्र में उन्होंने 36 घंटे तक लगातार काम, कोविड ड्यूटी के अनुभव और मरीजों से मिले स्नेह का उल्लेख किया है। इसके बावजूद वर्तमान माहौल में काम कर पाना असंभव बताते हुए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय जताया है, जिससे विभागीय खींचतान एक बार फिर उजागर हो गई है।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में पीजी काउंसलिंग शुरू होने से पहले प्रवेश और स्क्रूटनी कमेटी की गठन सूची विवादों में आ गई है। कॉलेज में पर्याप्त प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर होने के बावजूद एक डिमॉन्स्ट्रेटर को नियमों के विपरीत लगातार कमेटी में जगह दी गई है। डॉक्टरों की आपत्तियों के बावजूद नाम में बदलाव नहीं हुआ, जिससे पारदर्शिता और शासन के दिशा-निर्देशों पर सवाल खड़े हो गए हैं।






















